साक्षात्कार - पेरुमल मुरुगन



बात करीब छह-सात साल पुरानी है। हिंदी के एक लोकप्रिय बाल साहित्यकार ने एक बातचीत के दौरान मुझसे कहा था कि सबसे बेहतरीन बाल साहित्य हिंदी में ही लिखा जा रहा है। उनकी यह बात सुनकर मुझे थोड़ी हैरानी तो हुई थी, लेकिन मैं उनसे कुछ कह नहीं पाया; क्योंकि उस समय तक अन्य भारतीय भाषाओं के समकालीन बाल साहित्य के बारे में मेरी समझ बहुत सीमित थी। बाद में, जब मुझे विभिन्न भाषाओं के बाल साहित्य और उन पर लिखे गये आलेखों को देखने-परखने का अवसर मिला, तब मुझे यह अहसास हुआ कि हमारे सोचने और पढ़ने का दायरा कितना सिमटा हुआ है।

इसी दौरान मुझे पेरुमल मुरुगन की एक चित्र-पुस्तक पढ़ने का मौका मिला। 'सिर का सालन' के बाद इस चित्र-पुस्तक ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। और दिलचस्प बात देखिए कि ये दोनों ही चित्र-पुस्तकें मूल रूप से हिंदी की नहीं हैं।

पेरुमल मुरुगन तमिल भाषा के एक बहुत ही प्रतिष्ठित लेखक और विद्वान हैं। वे बच्चों के लिए भी खूब लिखते हैं। मुरुगन जी मुख्य रूप से ग्रामीण जीवन, जाति व्यवस्था की समस्याओं और समाज की कड़वी सच्चाइयों को बहुत ही सीधे और सच्चे रूप में लिखने के लिए जाने जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की लॉगलिस्ट में जगह बनाने वाले और जेसीबी साहित्य पुरस्कार जीतने वाले वे पहले तमिल लेखक हैं। उनके उपन्यासों में बच्चों का जीवन और उनका बचपन बहुत ही वास्तविक तरीके से सामने आता है; 'छोटू और उसकी दुनिया' (हिंदी अनुवाद - सेतु प्रकाशन) इसका एक अच्छा उदाहरण है।

साल 2023 में तूलिका प्रकाशन ने बच्चों के लिए उनकी एक चित्र-पुस्तक 'आउट इनटू द मूनलाइट' (Out into the Moonlight) प्रकाशित की थी। यह पुस्तक 2024 के 'वैली ऑफ द वर्ड्स' (Valley of Words) पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट की गयी थी। बहरहाल, यहाँ 'वैली ऑफ द वर्ड्स' को दिये गये पेरुमल मुरुगन का वह साक्षात्कार प्रस्तुत है, जिसमें उन्होंने इस चित्र-पुस्तक की पूरी रचना-प्रक्रिया पर विस्तार से बात की है।


आपको पहली बार कब लगा कि आप लेखक बनना चाहते हैं?

ऐसा कोई एक तय समय नहीं था जो मुझे याद आता हो कि तब मुझे ऐसा लगा। मैं तो तब से लिख रहा हूँ जब मुझे यह भी ठीक-ठीक पता नहीं था कि समाज में ‘लेखक’ नाम की कोई जगह होती है। जब स्कूल बीत गया और कॉलेज शुरू हुआ, तब मैंने जाना कि मेरा जो भविष्य है, वह लिखने में ही है। जिस दिन मैंने तमिल साहित्य को अपने विषय की तरह चुना, उसी दिन मैंने जान लिया था कि आगे चलकर मैं एक लेखक ही बनूँगा।

क्या आप किसी ऐसी किताब के बारे में बताएँगे जिसने आपको एक लेखक और एक मनुष्य के रूप में बनाया?

मैं आर. शन्मुगसुंदरम के उपन्यास नागाम्माल का नाम लूँगा। उसमें तमिलनाडु के उस पश्चिमी हिस्से का गाँव का जीवन है, जहाँ से मैं आता हूँ। उस उपन्यास को पढ़कर मैंने अपने भीतर और अपने जीवन को एक बिल्कुल उजाले की तरह देखा। उसने यह तय करने में मेरी मदद की कि एक लेखक के रूप में मुझे क्या करना है।

हमें इस यात्रा (चाँदनी रात में चित्र पुस्तक) के बारे में कुछ बताइये कि आपने यही पुस्तक क्यों लिखी?

यह किताब असल में मेरी माँ के बारे में लिखे एक लेख का दूसरा रूप है। वह मेरा अपना एक निबंध था, पर मुझे लगा कि उसके भीतर जो दृश्य और लोग हैं, वे बच्चों को अच्छे लगेंगे। तूलिका पब्लिकेशन्स ने, जिसने इसे छापा, मेरी बात मान ली। जब मैं इस किताब को लिख रहा था, तभी मुझे लगा कि मैं इस घटना को निबंध की जगह एक कहानी की तरह भी कह सकता था। चित्रों को मन में रखकर लिखना मेरे लिए एक बहुत सुंदर अभ्यास जैसा था।

इस किताब को लिखते हुए आपने सबसे अचरज भरी कौन सी बात सीखी?

भाषा मेरा माध्यम है और आँखों के सामने दिखने वाले दृश्य मेरे लिखने की ताकत हैं। इस किताब में चित्रों ने अपना काम खुद कर दिया। मैं उन चित्रों के सहारे-सहारे अपनी भाषा में चलता रहा और मुझे अचरज हुआ कि शब्द कितने छोटे और गहरे हो गये थे। इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि भाषा को किसी दूसरी कला के साथ कैसे एक कर दिया जाता है।

लिखना आपको ताकत देता है या थका देता है?

दोनों बातें होती हैं। जब कोई रचना ऐसी बन जाती है जिससे मन को संतोष मिले, तो वह और लिखने की एक सुंदर उत्सुकता भर देती है। पर अगर मन संतुष्ट न हो, तो एक उदासी सी होती है और लगता है कि लिखने का भला क्या मतलब है।

क्या लिखते समय आपके मन में कोई खास पाठक था?

मैं पढ़ना पसंद करने वाले किसी खास आदमी को सोचकर नहीं लिखता। यह जानना बहुत कठिन है कि मेरे पाठक कौन हैं। अगर आप उन्हें जान भी लें, तो उन्हें सामने रखकर भला कैसे लिख पायेंगे? हाँ, पर जब आप लिखना पूरा कर लेते हैं और उसे माँजने बैठते हैं, तब पाठक की आँख से देखने के लिए कुछ जगहों को थोड़ा-बहुत बदलना पड़ता है।

किताबों को लोगों तक पहुँचाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

सबसे अच्छा तरीका यही है कि किताब के बारे में लोग अधिक से अधिक बातें करें और अपनी राय दें।

नये लिखने वालों के लिए आपकी क्या सलाह है?

'बस, लिखते रहिये।'

 

(Photo credit: Vogue India) 
Interview credit - VoW 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

'इल्म' में प्रोफेसर कृष्ण कुमार का व्याख्यान

बच्चों के पुस्तकालय: वैश्विक रुझान और बदलता स्वरूप

गणित रस: बालमन की पगडंडियों पर 10 चित्र पुस्तकों का सफ़र