नाटक गाँव के नाम ‘नरेंद्रपुर’ है!
संस्मरण नाटक गाँव के नाम ‘नरेंद्रपुर’ है! (नाच उपन्यास की पूर्व पीठिका) (नाच किशोर पाठकों के लिये लिखा गया उपन्यास है , जो इस महीने एकलव्य , भोपाल से प्रकाशित हुआ है। तकरीबन दस साल तक इसपर काम करता रहा। इन वर्षों में इसके अलग-अलग ड्राफ्ट तैयार हुए। पाठकों के सुझाव भी मिले। सहयोग के लिये सभी का शुक्रिया। वैसे इसके लेखन प्रक्रिया की शुरुआत वर्ष 2016 के आरम्भ में हुई थी। जब मुझे एक कथा शिविर में भाग लेने का मौका मिला था। जिसके अनुभवों को आधार बनाकर एक संस्मरण भी लिखा था , जो कथा शिविर की स्मारिका में साथी कथाकारों के साथ प्रकाशित भी हुआ था यहाँ प्रस्तुत है वह संस्मरण ।) उस शाम बहुत ही असमंजस की सी स्थिति थी। ऑफिस से लौटकर मैं मेल चेक कर रहा था। एक मेल सिवान में आयोजित होने वाले ‘कथा शिविर’ से संबंधित था। शिविर में शामिल होने के लिए सहमति मांगी गई थी। मुझसे जैसे एकदम नए लेखक के लिए इस तरह का आयोजन एक मौके जैसा था- कुछ सीखने , कुछ समझने और कुछ गुनने बुनने का। बाद में मेल में स्थान का नाम भी था- जीरादेई प्रखंड का ‘नरेंद्रपुर गाँव’। जीरादेई का नाम ...