बाल साहित्य का घोषणापत्र
बाल साहित्य का घोषणापत्र मनोरंजन नहीं , अनुभव — संरक्षण नहीं , साहस हम यह मानने से इंकार करते हैं कि बाल साहित्य का उद्देश्य बच्चों को केवल प्रसन्न रखना है। हम यह भी मानने से इंकार करते हैं कि बचपन एक सरल , निर्दोष और जटिलता-रहित अवस्था है। यह घोषणापत्र उस धारणा के विरुद्ध है जो बच्चों को कमज़ोर , अपूर्ण और असहज सत्य के अयोग्य मानती है—और उस साहित्य के विरुद्ध भी , जो वयस्कों की नैतिक सुविधा के लिये बच्चों की भावनात्मक दुनिया को संकुचित करता है। 1. बचपन कोई कोमल भ्रम नहीं है हम घोषणा करते हैं कि बचपन एक पूर्ण मानवीय अवस्था है— जिसमें भय है , ईर्ष्या है , प्रेम है , द्वंद्व है , अपमान है , अकेलापन है , और प्रश्न हैं। जो समाज यह मानता है कि बच्चे इन अनुभवों से अनभिज्ञ हैं , वह या तो बच्चों को नहीं देखता , या स्वयं को नहीं देखना चाहता। बचपन को निर्दोष कहकर हम उसकी पीड़ा को अदृश्य बना देते हैं। हम इस अदृश्यता को अस्वीकार करते हैं। 2. बच्चों को “बचाने” की भाषा दरअसल नियंत्रण की भाषा है जब हम कहते हैं— “यह विषय बच्चों के लिये ठीक नहीं” तो हमें ईमानदारी से यह स्वी...