पहली अप्रैल: एक मज़ाक की खुशबू
तारीख में आज ज़रा आप एक दृश्य के बारे में सोचिये। हज़ारों लोग हैं जो ब्रिटेन में रहते हैं। वे अपना काम-धंधा छोड़कर एक जगह रुक गये हैं। घड़ी में सुबह के 9.40 बजे हैं और वे सब एक साथ हवा में उछल रहे हैं। फिर थोड़ी देर बाद , जब वे ज़मीन पर वापस आते हैं , तो अपनी कलाइयों पर बँधी घड़ियों को देखते हैं और धीरे से मुस्कुरा देते हैं। यह कोई जादू नहीं था , यह तो पहली अप्रैल का एक किस्सा था। पहली अप्रैल यानी वह दिन , जिसे हम मूर्खों का त्योहार कहते हैं। हुआ यह था कि बी.बी.सी. रेडियो पर पैट्रिक मूर नाम के एक आदमी ने सबको भरोसा दिला दिया था। उन्होंने कहा था कि एक खास वक्त पर प्लूटो ग्रह , बृहस्पति के ठीक पीछे से गुज़रेगा। इससे एक ऐसा खिंचाव पैदा होगा कि लोग हवा में उछलेंगे तो उन्हें अपना होना बहुत हल्का महसूस होगा। फिर क्या था! वक्त आते ही लोग उछलने लगे। ताज्जुब तो यह है कि बहुतों ने फोन करके बताया कि उन्हें सचमुच हल्कापन लगा। पर कुछ देर बाद उन्हें याद आया कि अरे , आज तो पहली अप्रैल है! उन्हें लगा कि वे बी.बी.सी. द्वारा मूर्ख बना दिये गये हैं। पहली अप्रैल को हम सब थोड़े ज़्यादा सचेत रहते हैं। ह...