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ताला, चाबी और एक बहुत बड़ी चुप्पी

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चकमक , मार्च 2026 में प्रकाशित ' ताला सुधारनेवाला ' कविता के बहाने कविता डायरी स्तंभ पर एक टिप्पणी   एक ताला है। ताला लोहे का बना हुआ है और वह बंद है। ताले के पास एक आदमी खड़ा है जो ताले सुधारता है। वह ताले को अपने कान के पास ले जाता है और कुछ सुनता है। ताले के भीतर से कोई आवाज़ आती होगी जिसे केवल वही सुन सकता है। राजेश जोशी ने इसे देखा और एक कविता लिख दी। ताला ठीक करना केवल एक काम नहीं है। यह ताले के भीतर उतरना है। ताला जब चुप होता है , तो उसकी चुप्पी को भी सुनना पड़ता है। ताला एक तरह की बाधा है। जीवन में भी बहुत सारी बाधाएँ होती हैं जो ताले जैसी दिखती हैं। पर हर ताले के लिये एक चाबी होती है। चाबी एक हुनर है , वह एक धीरज है। चाबी को ताले के भीतर बहुत सावधानी से बिठाना पड़ता है , जैसे किसी उदास आदमी के पास बैठकर उसकी बात सुनी जाती है। नरेश सक्सेना जी ने इस कविता को पढ़ा और एक टिप्पणी लिखी। उन्होंने कहा कि कविता के सीधे-सादे वाक्य धीरे-धीरे बड़े हो जाते हैं। वे इतने बड़े हो जाते हैं कि उनमें पूरा जीवन समा जाता है। वे कहते हैं कि ' चाबी खोना ' कोई छोटी बात नहीं है , यह एक वि...

पहली अप्रैल: एक मज़ाक की खुशबू

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तारीख में  आज   ज़रा आप एक दृश्य के बारे में सोचिये। हज़ारों लोग हैं जो ब्रिटेन में रहते हैं। वे अपना काम-धंधा छोड़कर एक जगह रुक गये हैं। घड़ी में सुबह के 9.40 बजे हैं और वे सब एक साथ हवा में उछल रहे हैं। फिर थोड़ी देर बाद , जब वे ज़मीन पर वापस आते हैं , तो अपनी कलाइयों पर बँधी घड़ियों को देखते हैं और धीरे से मुस्कुरा देते हैं। यह कोई जादू नहीं था , यह तो पहली अप्रैल का एक किस्सा था। पहली अप्रैल यानी वह दिन , जिसे हम मूर्खों का त्योहार कहते हैं। हुआ यह था कि बी.बी.सी. रेडियो पर पैट्रिक मूर नाम के एक आदमी ने सबको भरोसा दिला दिया था। उन्होंने कहा था कि एक खास वक्त पर प्लूटो ग्रह , बृहस्पति के ठीक पीछे से गुज़रेगा। इससे एक ऐसा खिंचाव पैदा होगा कि लोग हवा में उछलेंगे तो उन्हें अपना होना बहुत हल्का महसूस होगा। फिर क्या था! वक्त आते ही लोग उछलने लगे। ताज्जुब तो यह है कि बहुतों ने फोन करके बताया कि उन्हें सचमुच हल्कापन लगा। पर कुछ देर बाद उन्हें याद आया कि अरे , आज तो पहली अप्रैल है! उन्हें लगा कि वे बी.बी.सी. द्वारा मूर्ख बना दिये गये हैं। पहली अप्रैल को हम सब थोड़े ज़्यादा सचेत रहते हैं। ह...